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बचपन (कविता संग्रह)
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बचपन (कविता संग्रह) Voice and Text
     
तकदीर
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तकदीर ने खेंची कैसी यह लकीर

एक राजा और दूसरा फकीर

बात यह है कितनी अजीब

कोई अमीर तो कोई गरीब

अमीर के पास गाड़ी और बंगला

गरीब बेचरा फिरता कंगला

अमीर खाता है शाही पकवान

गरीब के हिस्सों जूठन का दान

प्रभु के बन्दे दोनों कहलाते

फिर भी इकट्ठे न चल पाते

एक मन्दिर के अन्दर होते

दूसरे बाहर हाथ फैलाते

यह कैसी विडम्बना है भाई

अमीर के पास कपड़े रखने की जगह नहीं

और गरीब को देखो

तन ढंकने को कपड़ा नहीं 

फिर भी देखा यही है जाता

अमीर सदा चिन्तित ही रहता 

चिन्ता में डूबा इंसान

न पा सकता भगवान को पहचान

सही धनवान वही है जो

लेता सदा ईश्वर का नाम

धन - दौलत तो आज तक

आई न किसी के काम

भगवान के हैं रंग निराले

दोनों ही है उसको प्यारे

कल की लकीरों में क्या लिख दे वो

अमीर को गरीब

गरीब को अमीर बना दे 

यही है विधाता का खेल

माटी में होगा दोनों का मेल।

       
- स्वर्ण सहगल