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कविता संग्रह
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सभी एडजस्टमेंट करते हैं
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अपनी वाकपटुता से 
नई-नई बातें गढ़ते हैं
आकाश कुसुम तोड़ लाने के 
सपने दिखाते हैं।
और अंतरिक्ष की असीम ऊंचाईयों 
में ले जाकर 
मेरे मन को छोड़ आते हैं।
मैं 
बेचारा 
दिशाहीन 
भटकता हूँ,
अंतरिक्ष में 
फूलों को ढूंढने का 
यत्न करता हूँ।
हाथ लगता है लेकिन 
खालीपन
सूनापन
और 
भटकता हुआ जीवन !