+91-11-41631787
बचपन (कविता संग्रह)
Select any Chapter from
     
नौकर की छुट्टी का ऐलान
ISBN:

 



नौकर ने छुट्टी का किया ऐलान

घर में सन्नाटा छा गया

सबके चेहरे हुए परेशान

अब क्या होगा

कौन संभालेगा रसोई

नौकर बिन क्या होगा हमारा

कुछ तो इन्तजाम करना होगा

बहुत सोच - विचार के बाद

हुआ फैसला बंटाओ हाथ

चेहरे सबके लटक गए

एक - दूसरे पे अटक गए

‘‘मुझे आंफिस रोज है जाना।’’

- एक बोला

‘‘मेरा काम है बहुत महान।’’

- दूसरे ने मुंह खोला

सबकी कोई - न - कोई मजबूरी

रह गई बस मैं एक अकेली

तुम्हें और काम ही क्या है

सबकी आंखें कह रही थी

कुछ कह न सकी

मैं चुप ही रही

मन ही मन मैंने सोच लिया

सब मित्रों को फोन किया 

कुछ तो मेरा करो खयाल

ढूंढों कहीं - न - कहीं से जल्दी

भेजो उसको मेरे पास

और तो सब कुछ कर सकती हूँ

नहीं छोड़ सकती मैं ताश

किस्मत थी मेरी भी अच्छी

मिल गई मुझे काम से छुट्टी

कुछ ही दिनों में नौकर आया

सबने ली इक ठड़ी सांस

आंखें उनकी कह रही थीं

देखा न, कितना हमने बंटाया हाथ

हम हैं सदा तुम्हारे साथ।

       
-  स्वर्ण सहगल