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राम राज्य
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बीज गणित
ISBN: 81-7220-092-7

  

 

बीज गणित

 

मन नि:शब्द

खोज रहा

कुछ शब्द,

मानस-पटल पर

अक्षरों को जोड़ने की चेष्टा

में सलंग्न !

 

प्यास मन की

अक्षर

शब्दों में ढलकर

बुझांएगे !

 

रास्ते की भीड़ में

चलना दुर्भर

लेकिन

मन मानता नहीं

कि साथ है आज

कोई मेरे !

- रोशनी नहीं पर्दे पर,

न छाया कोई,

न स्वर कोई गूँज रहा !

- शब्द

निःशब्द बने

राह चलते सब अजनबी चेहरे!

समाज का दायरा

दायरे में एक और

दायरा घर का

- घर के दायरे में

दूसरे के घर की

कहीं रोशनी

और

उस रोशनी से

बाहर निकलती

विषमताएँ !

 

यह हिसाब-किताब

इतना सरल नहीं

जो दो दूनी चार

करने से पूरा हो जाए

और

साथ ही

मन जानता है

इसे अधिक उलझा समझना

(या और उलझा लेना)

- "बीज गणित" की तरह

उचित नहीं !

"बीज गणित" वैसे भी

मेरी समझ के बाहर की चीज है !

 

मन समझता है

- सीधी- स्पष्ट भाषा

और उसी भाषा से

जुडा़ गणित

ही समझ आता है

मन को।

"स्कवेयर रूटों" के जंगल में

उलझा हुआ प्रश्न

मन को समझ नहीं आता ।

 

चाहत है इसकी

- जीवन के रास्ते में

फूल अपनी सुगन्ध भी छोड़े, 

हवा में उनकी महक हो

और

किसी फूल का काँटा

चुभे भी तो

कहीं शोर न मचे,

कोई बहस न करे,

कोई बात न बनाए,

क्योंकि

फूल जब हमारा है

तो काँटों की चुभन से क्या डरना !

सभी अपने हों,

सभी अपनों के बीच

खिलखिलाते बीतें

हर पल !

- बातें बनाने वाले

दूर रहें

इस दायरे से !

- बातें,

सिर्फ बातें

छेदती हैं मन को

और ये मन

हँसने की चाहत लिए

ठगा-सा रह जाता है !

 

मन शब्द चाहता है

- मन को शब्दों से

भर दो !