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राम राज्य
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कल्पना
ISBN: 81-7220-092-7

कल्पना 

 

वो देखो

आकाश में पक्षियों का कलरव,

स्वच्छंद विचरण -

कोई चिन्ता नहीं जैसे!

ऐसा क्या भला

उल्लास-भरी जिन्दगी का राज?

 

हाँ,

सच कहा तुमने

- उनके संग है,

- प्रियतमा !

- एक उमंग

- एक तरंग

- एक कल्पना

 

कि

साँझ होते ही  

नीड़ में अपने

लौटेंगे और

दिन भर की थकान

पल भर

जी भरके प्रेमकर

खो जाएगी किसी अन्जानी जगह!

 

हाँ,

वे प्यार करेंगे,

नित नई-नई उड़ान भरने की

और ऊँचाईयों को छूने की

संग-संग

प्रेमिल कल्पना करेंगे!

 

प्रेम अमर है

उनका

- संघर्ष अपने मिलन का  

मीठी-मीठी बातों में

याद आकर

और रस भर देता है अक्सर! 

 

वे प्यार करते हैं

- मोह जाल में जकड़ कर नहीं

बल्कि

अपनी चाहत को

अपनी आत्मियता के

और निकट लाने को,

छल नहीं

न ढोंग कहीं  

- अपनी चाहत के दिवाने!

और  

ये दिवाने

- न ऊँच देखते हैं

न नीच कहीं,

न करते व्यर्थतम

भयावह स्थितियों की कल्पना ! 

 

उन्हें लगती समग्र सृष्टि

एक प्यार का सागर,

और अपनी लगती

ये सारे जहाँ की खुशियाँ!

 

आओ! हम भी

जीवन के सब रंगों को मिलाकर

एक हो जाएँ

न तुम, तुम रहो,

न मैं "स्वयं"

- हम दो एक हो जाएँ

और इन पक्षियों की भाँति

स्वच्छंद विचरण करें!