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राम राज्य
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भावना
ISBN: 81-7220-092-7

भावना

 

 

मेरी भावना  

के रूप का हर पहलू

इतना प्रबल हो

कि हवाओं को

अपना रुख पूछने के लिए

उसके निकट आकर रुकना पड़े !

जमाने की दिशा

चाहे बदल जाए

लेकिन

मेरी भावना अपनी जगह अडिग रहे! 

 

मन की तरंग कभी न टूटे

स्वप्न न इन आँखों से बिखरे,

मेरी भावना जा वहीं बँधे

जहाँ मन को कुछ चैन मिले !

तूफाँ का अंदेशा देकर

मन को कोई न तोड़ सके,

मेरी भावना वहीं बढ़े

मंजिल उसे जहाँ दिखे !