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राम राज्य
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मोहिता
ISBN: 81-7220-092-7

मोहिता 

 

नया सवेरा हुआ

सूरज नया-नया

फैल गई आकाश में

एक सुनहली किरण! 

 

कर दिया रोशन मन-आँगन

खिला-खिला लगता जीवन| 

 

घर भर में किलकारी गूँजी

सच होता देखा स्वप्न,

खिली-खिली देखी छवि मैंने

देख लिया मयूरी-सा तेरा मन| 

 

जीवन की परिभाषा बदली

बदल दिया मोहिनी ने मन

कभी कहता मैं इसे स्निग्धा,

जो स्नेह लिए आई,

कभी मोहिता

कभी मेघना

जो खुशियों की बरखा लाई|