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राम राज्य
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पोस्टमार्टम
ISBN: 81-7220-092-7

पोस्टमार्टम 

 

 

लोग जब  

अपनी ही धुन में मस्त

कुछ गढ़े-मुर्दों को उखाड़ कर

मेरे मन को चीरते हैं,

तब जार-जार रोने को

जी चाहता है

क्योंकि

हर कोई मेरी बेबसी समझने की अपेक्षा

अपने ही मान प्रतिस्थापित

करने की धुन में

मुर्दानी बातों की

बोटी-बोटी नोचता है! 

 

दिन-प्रतिदिन

ऐसा करना

और दूसरों के सामने

अपने बुद्धिजीवन्तता का  

प्रमाण देना

उसे कितना विराट,

कितना महान बनाता है

और

उसके मन को

कैसी शान्ति मिलती है

यह तो वही जाने,

(क्योंकि मुझे तो मुर्दे उखाड़ने वालों

से घिन्न आती है!)

हाँ,

इतना जानता हूँ

कि

कोई भी नहीं चाहता

कि

उसके किसी प्रियजन

के मुर्दे का

पोस्टमार्टम हो

- आखिर दर्द की परिभाषा

भी तो कुछ होती है!