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राम राज्य
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चितौड़गढ़ (एक)
ISBN: 81-7220-092-7

 

चितौड़गढ़ (एक) 

 

अपनी जीवन धारा में बहता 

आज

कितनी दूर चला आया हूँ -

यहाँ ठहर कर  

महसूस हो रहा है

कि

जीवन तो वहीं पीछे रह गया

दूर-जहाँ से चला था

 मैं!

 यहाँ,

मेरा अकेलापन

एहसास देता है

कि

जीवन बिना कुछ नहीं!

जल्दी-जल्दी चलती

घड़ी की सुईयाँ  

मानो ठिठक गई हैं,

वक्त जैसे

अपनी भावनाओं को व्यक्त

करना

भूल गया है

और

उसी की मानिंद

मैं भी ठहर गया हूँ

- अपनों से विलग

इस सूने दिखते शहर में!