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राम राज्य
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मूल-मंत्र
ISBN: 81-7220-092-7

 मूल-मंत्र 

 

तुमने मेरे मन को

ठहराव दिया है,

एक दशक में

दस जनम का सुख दिया है

- लगता नहीं

मैं अकेला था कभी 

छाया बनकर तुम सदा

मेरे साथ चली। 

 

सीखा समझा एक ही मंत्र

"निरर्थक जीवन बिन कुटुंब !"

तुमने दिशा दी

दिया साथ मुस्कुरा के आगे बढ़ने की ललक दी

साथ चलकर हाथ मिला के।

निराशा की छाया नहीं पास मेरे

प्यार के दिए दो सितारे झिलमिलाते !

 

सारा आकाश मेरा है

सारी जमीं भी मेरी

प्यार की बुलन्दियों को

छू लिया मैंने तुम्हें पाकर जीवन मेरा

सार्थक हो गया

मेरी प्रिया !