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राम राज्य
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महक
ISBN: 81-7220-092-7

महक

 

तुम्हारी खुशी

आओ! हम भी बाँट लें

ऐसे चलो कि

जिन्दगी खुशियों की

सौगात बनी

सबको हँसाए,

जीवन की महक

ऐसी रहे कि

आँगन-तो-आँगन

हर राहगीर को भी महका जाए!

 

निकटता का एहसास

मन में रहे

कोई दूर तुमसे  रह पाए।

ऐसी खुशी दो

ऐसी हँसी दो

तुम्हारी चाहत में

जग सारा घुल-मिल जाए!