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राम राज्य
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राम-राज्य
ISBN: 81-7220-092-7

राम-राज्य 

 

कौन कहता है

राम-राज्य इतिहास की बात है? 

 

आदर्शो की दुहाई देकर

घिसे-पिटे राग अलापने से

भला

कौन सिद्ध कर सका है

कि

राम-राज्य

अब नहीं रहा? 

 

सूरज

सुबह निकलकर

चलता है

रुकता नहीं

थकता नहीं

शाम को अस्त हो जाता है

- रात के अन्धेरे को देखेकर

हताश हो जाना

निराश हो जाना 

 

और

यह सिद्ध करने की

कोशिश करना

कि

राम-राज्य का सूर्य भी

अस्त हो चुका है

- कितनी नासमझी की बात है! 

 

आशा त्याग देना

जीवन की परिभाषा नहीं!

रात का अंधियारा

तो

बीते कल की बात है! 

 

देखो!

सूरज उगा है

चल रहा है

निरन्तर -

राम-राज्य की मानिंद

शान से

नए-नए मान

स्थापित करता

- राम-राज्य भला ऐसे में

 

कैसे

इतिहास के दबे पन्नों

पर छिपा हो सकता है? 

राम-राज्य

आज भी है

- तभी तो

प्रजातंत्र की बात

मैं

आप

सभी

करते हैं! 

 

क्या आज

हमें अपनी बात कहने का

अधिकार नहीं?

क्या आज

आप

अपने राजा के द्वार

अर्धरात्रि को

नहीं खटखटा सकते? 

 

अरे....!

राम राज्य तो

कितनी

उन्नति कर चुका है! 

 

- आज आप

न केवल

अपने राजा के

द्वार खटखटा सकते हैं

- बल्कि

अपनी गाड़ी में बिठाकर

कर्मचारियों को आदेश

दिलाने

उसे

उनके घर तक

ले जा सकते हैं 

- फिर भी कहते हैं

रामराज्य बीते युग की बात हैं? 

 

राजा राम को तो

पुश्तैनी गद्दी

मिली थी

- वह भी

चौदह-बरस

कठोर बनवास

के बाद

और आज - ?  

 

- आज आप

अपना राजा

स्वयं चुनते हैं!

- चाहे कोई जेल में हो

- कोई डाकू बन जन-जन

को लूटता हो

- कोई स्मगलर

- कोई मौत का ठेकेदार

- स्मैक-अफीम के

भंडारों का

करता हो व्यापार

- मर्जी जिस पर आए

उसे अपने जीवन का

ताज पहना सकते हैं,

जो मन को न भाए

उसे गद्दी से उतार

फेंक सकते हैं! 

- फिर भी कहते हैं

राम-राज्य इतिहास की बात है? 

 

कोई है?

कोई है?

- जो सिद्ध कर सके

कि

राजा

मैंने नहीं

तुमने नहीं

किसी ने नहीं,

बल्कि

पैसे की ताकत ने,

गुंडागर्दी

और

आतंक ने

चुना है? 

 

अरे....!

यह तो

राम-राज्य को

बदनाम

करने की चाल है! 

 

देखते नहीं

रोज चुनाव होते हैं!

देखते नहीं

सारी की सारी

सरकारी मशीनरी

वोटों की गिनती करती है! 

 

दूर-दराज के

गाँवों में,

जहाँ केवल

दो प्राणी  

बसते हैं,

सैंकड़ों हाथ जोड़ कर

पहुँचते हैं

- वन्दना करते हैं

कि

तुम जनता-जनार्दन हो!

- जिसे चाहो

चुन लो,

- जिसे चाहो

दुत्कार दो! 

 

- हम तो सेवक हैं

- दास हैं तुम्हारे

- राजा नहीं!

राजा की परिभाषा

दूसरी है,

राजा प्रजा का सेवक है! 

 

और

यही

राम-राज्य का

मूल-सिद्धान्त है! 

 

तभी तो

कहता हूँ

राम-राज्य

बीते कल की नहीं,

इतिहास की नहीं

आज की बात है! 

राम-राज्य आज भी

मेरे देश का ताज है!